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पुरक़ैफ-ए-मंज़र
मेरे फोटो, मेरे गीत
Wednesday, January 9, 2008
दिया और सूरज
गांव के घूर पर जलता एक दिया, सूरज की रोशनी के साथ साथ सूरज को चिढ़ाता हुआ जैसे चिढ़ाता है
कोई नन्हा सा बच्चा, किसी अपने से बड़े बुजुर्ग को।
सोधी सी शाम होने के पहले कोई जला गया था टोटके के लिए।
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