Monday, February 25, 2008

नंगा किनारा........





























समंदर की लहरों के साथ हवा में घुले उबटन को







गोरी चमड़ी से लपटते







दूर देश से आराम







फरमाने आये हैं परदेशी..........इन गोवा

Sunday, February 24, 2008

बहुरूपिया....




देखो देखो.........


शहर की बीच सड़क पर भेष बदले शांती का संदेश दे रहा है बहुरूपिया।


और टकटकी लगाये लोग तख्ती पर नजर डाले बगैर


देख रहे हैं बहुरूपिया के अजब गजब चेहरे को।


ये बहुरूपिया रोज निकलता है नये नये भेष में।


लोग सिर्फ उसके रूप रंग पर मर जाते हैं,


कोई नही समझता उसकी चाल को।


कोई नही समझता उसके संदेश को।


सब कुछ नाटक सा चलता रहता है


शहर की सड़को वाले रंगमंच पर।


हे बहुरूपियें तुम रोज निकलो शांति संदेश के साथ


कभी न कभी लोग तुम पर नही तुम्हारी तख्ती पर नजर जरूर डालेगें।

Saturday, January 12, 2008

जलवा एक्सप्रेस....

साली ने चार साल से पागल बना रखा है
ये झुंझलाहट के शब्द है उस आशिक के जो चार साल से जलवा एक्सप्रेस को देख रहा है
अब तो लोगों ने इस आशिक का नाम दिवाना भजिया वाला रख दिया है
सच में जब वो निकलती है तो टैक्सी वाले, चाय वाले और चैनल वाले भी काम छोड़कर लाइन लगा कर सड़क पर आ जाते है।
इस एक्सप्रेस का आने का समय है सुबह दस बजे
और जाने का समय है शाम को छह बजे।
इस एक्सप्रेस पर बैठने की तो बात सोचना गलत होगा
लेकिन अगर आप जलवा एक्सप्रेस को देखना चाहते हैं तो आप इस पते और तय समय पर आ सकते हैं।
पता है-
हैंगआउट, कैफे
फेमस स्टूडियों के बगल में
महालक्ष्मी, मुंबई

Friday, January 11, 2008

होठों को छूकर....


कुछ जली जिंदगी कुछ अधजली जिंदगी
दिख रही है इन टुकड़ो में
टुकड़ो टुकड़ो में बटी जिंदगी भी दिख रही है इन टुकड़ो में
धुएं की तरह जिंदगी के उड़ते गुबार भी दिख रहे हैं इन टुकड़ो में
जाने कितने लोगों ने मिल कर इन टुकड़ो को सजाया होगा
ऐश के लिए इस ऐश ट्रे में।
कितने होठों की मिठास भी जमी है इन टुकड़ो में
सच में इन टुकड़ो में वो टुकड़े भी शामिल हैं जो कई लड़कियों के होठों को छू कर पड़े हैं
जिसकी गवाह हैं मेरी आंखे और मेरे शब्द।

दीमक लगी जड़ें

दीमक लगी जड़ें, निराश पड़ी हैं पांव फैलाये, मौत के इंतजार में.......किसी की आस लगाये।

Wednesday, January 9, 2008

दिया और सूरज


गांव के घूर पर जलता एक दिया, सूरज की रोशनी के साथ साथ सूरज को चिढ़ाता हुआ जैसे चिढ़ाता है
कोई नन्हा सा बच्चा, किसी अपने से बड़े बुजुर्ग को।
सोधी सी शाम होने के पहले कोई जला गया था टोटके के लिए।