Monday, June 16, 2008

बकलोल.....

हाय, कैसी हो....
तुम फोन पर ऐसी बाते क्यों करती हो
जो मुझे पसंद नही, जो तुम्हारे लिए भी ठीक नही
प्लीजजजजजजजजजज......फोन मत रखना,
ये फोन रखने की अपनी आदत छोड़ दो....
अरे, तुम गुस्सा हो जाओ तो ठीक है, मैं गुस्सा करूं तो....
क्या यार क्या बात करती हो....
अब बोलो, कब मिल रही हो....
कल मैं बहुत बिजी हूं......नही आज नही आ सकता
फिर तुम फोन रखने की बात करने लगी, सुधर जाओ यार
प्रॉब्लम को समझा करो यार।
कल........
हां कल गुड नाइट का मैसेज करना भूल गया था
तो..... क्या यार छोटी छोटी बातो पे लड़ती हो
चलो और बताओं नौकरी कैसी चल रही है
क्यों.....नौकरी क्यो छोड़ रही हो
अरे यार अभी तो शुरूआत है थोड़ी मेहनत तो करनी ही पड़ेगी।
हां नौकरी की शुरूआत में सबको ज्यादा काम करना पड़ता है तुम कोई अकेली थोड़ी हो।
हां हां....
ओके मम्मी आ गई....ओके बॉय
मुआआआआआआआआआआआआआआ।
मेरी बकलोल।

6 comments:

Sandeep Singh said...

सर जी न तो आप इतने भोले दिखते हैं कि उन नादान हरकतों को जज्ब कर जाएं और न ही मोहरतमा इतनी बकलोल नज़र आती हैं कि गुड नाइट कॉल न मिलने पर हमेशा के लिए रीझ जाएं। आप मनाने के लिए ब्लॉग का सहारा न भी लेते तो भी एक आध दिन की चुप्पी के बाद आखिरकार मान ही जातीं....लेकिन तब शायद ही ये चुटकी जमाने की नज़रों में आती।

Udan Tashtari said...

अच्छा है, लगे रहिये. :)

भुवनेश शर्मा said...

कविता अच्‍छी लगी

mahashakti said...

मस्‍त है :)

The Truth Dare To Speak said...

kahi pe nigahe kahi pe nisana sir verryyyy romantic ye mausam ka jadu hai mitwa................. sahi bola na keep it up......

neeraj said...

GURU, aapki baklol behad khaternak lagtee hain... Waise aap bhee is field me kafee lambe arse se lage ho to aapse jyada to nahee hee hongee. Khair, janta ko apna dard kyon bata rahe ho? yaheen thodee see kamjoree nazar aa rahee hai... GURU do't take otherwise.