Saturday, July 14, 2007

आई- टॉनिक

1-ऑफिस के किसी कोने में बैठकर
चुपके चुपके से इस टॉनिक का सेवन करते लोगो को आप अक्सर देंख सकते हैं।
2-अक्सर बॉस टाइप लोग चलते फिरते इस टॉनिक का सेवन कर लेते हैं।
3-1-2 के बीच का समय यानि लंच के टाइम लोग अक्सर खाना खाने के बजाय इसी टॉनिक का सेवन करके तरो-ताजा महसूस करते हैं।
4-गाड़ी चलाते चलाते भी अक्सर इस टॉनिक का सेवन किया जा सकता है। इसी के चक्कर में अक्सर एक्सीडेंट भी हो जाता है। कुछ पाने के लिए कुछ खोना तो पड़ता ही है।
5-अक्सर बस पर लोग इसी लिए यात्रा करते हैं। वहां पर इस टॉनिक को लेने के साथ वो महसूस भी करते हैं।
6-बस अड्डे पर ये टॉनिक और सामानों के साथ खूब मिलता है।
नोट- अब तो आप समझ ही गये होगे कि ये और कहां कहां मिलता होगा। लो भईयां फ्री में ही तो मिलता है लेकिन संभल के।

Thursday, July 12, 2007

ऑरकुट पे बॉस....

बॉस ऑरकुट पर हैं
इस खबर ने लोगों की नींद उड़ा दी है
ऑफिस के लोग सदमें में हैं
डर ऐसा जैसे....
बॉस ऑफिस के साथ-साथ अब
बेडरुम में भी झांक रहें हैं।
लोगों ने अपने बहुत से स्क्रेप की लाइनें
जो बड़ी हिम्मत के बाद लिखी थी जिसमें
बॉस शब्द का इस्तेमाल किया था मिटाना शुरु कर दिया है।
लेकिन डर ये जरुर है कि शायद...
बॉस ने वो सब कुछ पढ़ लिया है जो
बॉस की नजरों तक नही जाना चाहिए था।
जिन लोगो ने आज तक केवल ऑरकुट पर हाल खबर ली थी
उन लोगों ने फोन करके बताया है...
बॉश ऑरकुट पर हैं!
खबर आई है बॉस खुश हैं

Tuesday, July 10, 2007

चौकें मत............

ऑपरेशन कामसूत्र
पानी में सुहागरात
एड्स पीड़ित महिला से सामूहिक बलात्कार
टाइम पास आशिक
मस्जिद में बलात्कार
भगवान हुए शर्मसार
खाक हुआ बाजार एक्सक्लूसिव
लाइव आत्म हत्या
तीन साल का मुजरिम
करोड़पति भिखारी
चौकें मत जनाब.....ये खबरें हैं

Tuesday, July 3, 2007

बारिश-1

बादलों की गड़गड़ाहट के साथ
मानसून की धमक
धमक उन दिलों पर
जो देख चुके हैं
बारिश में बहती
अपनी गृहस्थी
जिसे जोड़ा था
घर में कितनी पंचायत के बाद
जिसके लिए उसने
छानमारी थी
बाजार की हर दुकान
जांच परख के
खरीदा था हर सामान
और अब फिर वो डर रही है
देख रही मानसून की शुरुआत के साथ
पानी की हर बूंद में
बहती अपनी गृहस्थी।

Tuesday, June 12, 2007

कफ़न वस्त्रालय

एक आदमी ने
बाजार के बीच चौराहे पर
एक दुकान खुलवाया
दुकान का खूब प्रचार प्रसार करवाया
और दुकान का नाम कफ़न वस्त्रालय रखवाया।

उसने बताया
मेरी दुकान में हर किस्म के कफ़न मिलते हैं
जिंदा एवं मरे दोनो जिस्म के कफ़न मिलते हैं
यहां गरीबों के भी कफ़न हैं
अमीरों के भी कफ़न है
लेकिन दाम और क्वालिटी में फर्क है
गरीबों का कफ़न छोटा और कम अर्ज है
अमीरों का कफ़न थोड़ा बड़ा होगा
रेशमी और सितारों से जड़ा होगा
हमारी दुकान का कफन हर किस्म हर दाम वाला है
और मेरा नाम कफन वस्त्रालय वाला है।

यहां नेताओं का कफन है
अभिनेताओं का कफन है
नेताओं का कफन काला है
अभिनेताओं का कफन अनेक रंग वाला है
और जो नेता अभिनेता दोनो हैं
उनका कफन ज्यादा दाम वाला है
क्योंकि उसमें जड़ी हैं मोतियां कढ़े हैं सितारे
और चारो तरफ लगी सजीली माला है
आओ एडवांस में ले जाओं कफन
मौत का नही भरोसा आज कल
आज कल उसका बोलबाला है
मेरा नाम कफन वस्त्रालय वाला है।

यहां साधारण एवं मार्डन
दोनों प्रकार की लड़कियों के कफन मिलते हैं
साधारण लड़कियों का कफन सफेद कपड़ा है
मार्डन लड़कियों का कफन जींस तगड़ा है
मेरे यहां ऊंची दुकान फीका पकवान नही है
मेरी दुकान में घटियां सामान नही है
मेरी दुकान का काम आला है
इसी लिए मेरा नाम कफन वस्त्रालय वाला है।

वेदों ने बताया है, पुराणों ने समझाया है
गीता ने उपदेश में सुनाया है
यदि तुमने जन्म लिया है तो मरण होगा
इस जीवात्मा का हरण होगा
तुम मरोगे, जरुर मरोगे
तुम्हारा शरीर दफन होगा
तब तुम्हारें पास न तो धन होगा न ही धर्म
सिर्फ तुम्हारे पास होगा दो गज या एक गज कफन
मेरा व्यापारिक सिद्धांत निराला है
इसी लिए मेरा नाम कफन वस्त्रालय वाला है।

इस इस्तहार को पढ़कर एक व्यक्ति झल्लाया
उसने दुकानदार से पूछा भाया
तुमने ये कफन की ही दुकान क्यो खुलवाया
तब दुकानदार ने उसको समझाया
देखो भाया
आज तो मौत हर जगह खड़ी है
जहां खड़ी है, वहां लाश पड़ी है
कुछ कटी है, कुछ सड़ी है
हर व्यक्ति को मौत देने की चाह बढ़ी है
इन्हीं बातों को मेरी व्यापारिक बुद्धि ने तड़ी है
इसी लिए ये धंधा मैंने चलाया है
और अपनी दुकान का नाम
कफन वस्त्रालय रखवाया है।

Thursday, June 7, 2007

दुश्मन मां.....

मां
तुम जब फोन पर
भरे गले से पूछती हो
कैसे हो बेटा
हजारों किलोमीटर दूर मैं बैठा
बरबस बोल देता हूं
ठीक हूं, ठीक हूं...सहमा सहमा सा।

सुबह बात होती है
तो मां पूंछती है...नाश्ता किया
दोपहर में बात होती है तो...खाना खाया या नहीं
शाम को ......खाना कब खाते हो
पर मां को मैं नही बताता...
कि नाश्ता करने को टाइम नही मिलता
और आफिस की कैंटीन का खाना अच्छा नही लगता.

मुझे याद है, जब मैं पिछले साल
गांव गया था,
मां चार टाइम चाय के लिए पूछती थी
उसे लगता था बेटा शहर से आया है
शायद मां को इस बात का पता नही था कि
शहर में रहने वाले अब क्या क्या पीने लगे हैं।

फोन पर अक्सर मैं
मां से पूछता हूं
घर के क्या हाल हैं
अरे बेटा..... मां कुछ देर के लिए चुप हो जाती है
और जब बोलती है, तो सिर्फ पूछती है
अपनी बताओ कैसे हो
मुझे लगता है
वो घर का सारा कोहराम
छुपा जाती है मुझसे।

अरे अभी कल की तो बात है
मैं अपने पिता जी से बात कर रहा था
वो घर का सारा कोहराम मुझे बता रहे थे
मेरी जिम्मेवारियों को बता रहे थे
तभी पीछे से मां की आवाज आई
अरे वो तो इतना दूर हमसे बैठा है
उसे क्यों टेंशन दे रहे हो,
इस बात पर मां को
पिता जी से डांट भी मिली थी।

मां तो ऐसी ही होती है

लेकिन आज जब मेरे पास
एक स्टोरी आई
जिसमें मां ने अपने बेटे का कत्ल किया था
तो मैंने स्टोरी को नाम दिया...
दुश्मन मां......तो मुझे एहसास हुआ

मां ऐसी भी होती है।
...पुरक़ैफ़