कल मैंने कवियों को गाली लिखा बहुत वाहवाही मिली
एक लेख में मैंने कई साहित्यकारों को खरी खोटी सुनाई बहुत वाहवाही मिली
इश्कबाज चिट्ठाकारों की भी कलई खोली थी खूब वाहवाही मिली
लेकिन कई बार मैंने देश के बारे में, समाज के बारे में सुधार की बात लिखी किसी ने नहीं पढ़ा
लगता है लेखक और साहित्यकार बंधुओं को गाली देना ही उनकी तारीफ समझी जाती है
भाई गाली देने और लेने से टीआरपी तो बढ़ती ही है। लेते रहो....देते भी रहो।
Wednesday, August 22, 2007
Subscribe to:
Post Comments (Atom)



1 comments:
राजेश जी,शायद आप ठीक कह रहे हैं,लेकिन हमे ऐसी बातों से हमेशा बचना चाहिए। क्यूँकि हो सकता है हम किसी की बात ना समझ पा रहे हो,और अपनी नासमझी के कारण उसे बुरा बताने की जगह चुप रह जाए तो ज्यादा बेहतर है...
Post a Comment