Tuesday, March 18, 2008

लाइट....फोटो प्रदर्शनी सीरीज-4

डांस ऑफ लाइट....





जर्नी ऑफ लाइट....



लाइट फ्लो......




वाटर रेनबो.....












लहरों पर रंगीनियां

Wednesday, March 12, 2008

धरोहर.. फोटो प्रदर्शनी सीरीज-3































नोट- ये सारी फोटो मैंने अपने मोबाइल फोन कैमरे से गोवा के चर्च और ओल्ड हाउस से ली है।





Monday, March 10, 2008

गांव से - मेरी फोटो प्रदर्शनी, सीरीज-2

घूंघट.......( धान की रोपाई करती गांव की महिलाएं कैमरा देखकर शरमा गईं)
मस्ती......

महुआ...(हम सबकी जड़ें ज्यादातर गांव से ही जुड़ी हैं)


एक लोटा पानी.....( खेत- खलियान में स्कूल से आने के बाद पानी ले जाती किसान की बिटिया)



सुकून......( मेरे बाग में आराम के लिए किसी किसान का बिछाया हुआ बिझौना)




बाजरा.......( ये फोटो मैंने तब क्लिक की है जब कई साल बाद अपने खेत पर गया था।)


नोट- घूंघट को छोड़कर सभी फोटो मैंने अपने मोबाइल फोन के कैमरे से क्लिक की हैं।


Sunday, March 9, 2008

मेरी फोटो प्रदर्शनी.....सीरीज-1

सूरज संग चांदनी
टर्न.......

बिग हैंड...स्माल लेग


मौजा ही मौजा.......



दम......




इंतजार.........





Monday, February 25, 2008

नंगा किनारा........





























समंदर की लहरों के साथ हवा में घुले उबटन को







गोरी चमड़ी से लपटते







दूर देश से आराम







फरमाने आये हैं परदेशी..........इन गोवा

Sunday, February 24, 2008

बहुरूपिया....




देखो देखो.........


शहर की बीच सड़क पर भेष बदले शांती का संदेश दे रहा है बहुरूपिया।


और टकटकी लगाये लोग तख्ती पर नजर डाले बगैर


देख रहे हैं बहुरूपिया के अजब गजब चेहरे को।


ये बहुरूपिया रोज निकलता है नये नये भेष में।


लोग सिर्फ उसके रूप रंग पर मर जाते हैं,


कोई नही समझता उसकी चाल को।


कोई नही समझता उसके संदेश को।


सब कुछ नाटक सा चलता रहता है


शहर की सड़को वाले रंगमंच पर।


हे बहुरूपियें तुम रोज निकलो शांति संदेश के साथ


कभी न कभी लोग तुम पर नही तुम्हारी तख्ती पर नजर जरूर डालेगें।